क्या बच्चे को जन्म देना बच्चे के लिए दर्दनाक है?HealthPlanet

Posted on Mon 17th Oct 2022 : 10:50

डिलीवरी के समय मां को बहुत तेज दर्द होता है और प्रसव पीड़ा इतनी तेज होती है कि महिलाएं तड़प जाती हैं। वहीं बच्‍चे के लिए भी गर्भ से बाहर आने तक का सफर काफी लंबा और मुश्किल होता है।

ये तो हर कोई कहता है कि शिशु को जन्‍म देने के लिए मां को बहुत दर्द सहना पड़ता है लेकिन क्‍या कभी किसी ने ये सोचा है कि गर्भ से बाहर की दुनिया में आने के लिए बच्‍चे को किस-किस चीज से गुजरना पड़ता है।

​क्‍या बच्‍चा लेता है डिलीवरी का फैसला

गर्भ में शिशु के लिए बहुत आरामदायक वातावरण होता है। एम्निओटिक फ्लूइड शिशु को बाहरी दुनिया से सुरक्षा देती है और प्‍लेसेंटा से उसे भरपूर पोषण मिलता है।

जब बच्‍चा गर्भ में इतना ही कंफर्टेबल होता है तो फिर क्‍या वो चीज है जो उसे बाहर आने के लिए कहती है?

इस बात पर रहस्‍य बना हुआ है कि किस वजह से लेबर पेन शुरू होता है लेकिन एक्‍सपर्ट्स का कहना है कि जब बच्‍चे के फेफड़े पूरी तरह से मैच्‍योर हो जाते हैं, तब लेबर की प्रक्रिया की शुरुआत होती है।

बच्‍चे का शरीर लेबर और डिलीवरी शुरू करने के लिए मां को हार्मोनल सिग्‍नल भेजता है। यदि पहले से ही सी-सेक्‍शन प्‍लान हो, तो डॉक्‍टर लेबर पेन लाने की शुरुआत करते हैं।


​क्‍या बच्‍चे को भी होती है कॉन्‍ट्रैक्‍शन

जन्‍म लेने से पहले ही शिशु को टच फील होने लगता है। प्रेग्‍नेंसी के दौरान जब भी मां या पिता पेट पर हाथ फेरते हैं, तो बच्‍चा किक मारकर उसका जवाब देता है।

गर्भाशय मांसपेशियों की परतों से बना होता है जो बच्चे को जन्म नलिका के जरिए बाहर निकालने के लिए सिकुड़ती हैं। एम्निओटिक फ्लूइड कॉन्‍ट्रैक्‍शन के दौरान महसूस होने वाले प्रेशर से बच्‍चे को बचाता है।

लेबर के दौरान मां को इलेक्‍ट्रॉनिक फीटल मॉनिटरिंग देने पर कॉन्‍ट्रैक्‍शन के रिस्‍पॉन्‍स में शिशु की हार्ट रेट में बदलाव देखे गए हैं। इससे पता चलता है कि आपके बच्‍चे को कॉन्‍ट्रैक्‍शन कैसे महसूस होती हैं।


​क्‍या कॉन्‍ट्रैशन से बच्‍चे को दर्द होता है

लेबर की शुरुआत में महिलाओं को थोड़ी-थोड़ी देर में हल्‍के कॉन्‍ट्रैक्‍शन महसूस होते हैं। इससे बच्‍चे को कोई दर्द तो नहीं होता लेकिन हल्‍का प्रेशर जरूर महसूस हो सकता है। लेबर के दौरान ब्रीदिंग टेक्निक और सांस लेने की प्रक्रिया पर ध्‍यान देने से मांसपेशियों में आया तनाव कम होता है। इससे एंडोर्फिन भी उत्तेजित होता है।


​कब होता है बच्‍चे को दर्द

लेबर के आगे बढ़ने पर तेज कॉन्‍ट्रैक्‍शन उठने लगती हैं। अब जल्‍दी-जल्‍दी और ज्‍यादा देर तक कॉन्‍ट्रैक्‍शन रहती हैं। बच्‍चे का सिर नीचे आ जाता है। बच्‍चे को पेल्विस के जरिए बाहर आना होता है और बच्‍चेदानी के मुंह से बाहर निकलना होता है, कॉन्‍ट्रैशन बच्‍चे के सिर पर ज्‍यादा प्रेशर बनाती हैं।

अब यह कह पाना मु‍श्किल है कि इस स्‍टेज पर बच्‍चा क्‍या महसूस करता है लेकिन खोपड़ी की हड्डियों को ओवरलैप करने के लिए बच्‍चे का सिर पर्याप्‍त रूप से सिकुड़ता है।

बच्‍चा बोलकर नहीं बता सकता कि इस पूरी प्रक्रिया में उसे भी दर्द हुआ, इसलिए यह कह पाना मुश्किल होगा कि बच्‍चों को भी डिलीवरी के दौरान मां की तरह दर्द सहना पड़ता है।

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